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जोधपुर में आज़ादी का जश्न, VIP मूवमेंट ने छीन ली मुस्कान

स्वतंत्रता दिवस से पहले जोधपुर में VIP काफिले के लिए बदली ट्रैफिक व्यवस्था ने ली एक बच्चे की जान !

जोधपुर hct desk : स्वतंत्रता दिवस के जश्न से ठीक पहले, जोधपुर में एक दिल दहलाने वाली घटना ने शहर को झकझोर दिया। एक मासूम स्कूली छात्र की हिट-एंड-रन दुर्घटना में मौत हो गई, और इसके पीछे की वजह कथित तौर पर VIP मूवमेंट के लिए लागू की गई वन-वे ट्रैफिक व्यवस्था बताई जा रही है। इस घटना ने न केवल प्रशासन की लापरवाही को उजागर किया है, बल्कि VIP संस्कृति पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

क्या हुआ उस दिन?

सोशल मीडिया और स्थानीय खबरों के मुताबिक, जोधपुर की रेजिडेंसी रोड पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल होने आ रहे थे। उनके वीवीआईपी काफिले के लिए ट्रैफिक को अचानक वन-वे कर दिया गया। तभी, एक स्कूली छात्र को तेज रफ्तार वाहन ने टक्कर मारी और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि इस बदलाव के बावजूद भारी वाहनों पर रोक नहीं लगाई गई, जिससे हादसा हुआ। दुख की बात यह भी है कि उसी दिन, इसी ट्रैफिक व्यवस्था के कारण एक मरीज समय पर अस्पताल नहीं पहुँच सका और रास्ते में ही उसकी जान चली गई।

सोशल मीडिया पर आक्रोश

प्लेटफ़ॉर्म X पर घटना के बाद गुस्सा फूट पड़ा। एक यूजर ने लिखा, “VIP मूवमेंट के लिए ट्रैफिक एकतरफा करने से मदद देर से पहुँची। यह लापरवाही नहीं, संवेदनाओं के साथ क्रूर मजाक है।” दूसरे पोस्ट में सवाल उठाया गया, “क्या VIP की सुविधा आम लोगों की जान से ज्यादा कीमती है? यह अमानवीयता है।” कई लोगों ने इसे भारत के “रोटेन VVIP कल्चर” की मिसाल बताते हुए सरकार और प्रशासन से जवाबदेही की माँग की।

प्रशासन की चुप्पी और सवाल

जोधपुर पुलिस और प्रशासन ने अभी तक इस घटना पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। लोगों का गुस्सा इस बात पर भी है कि अगर VIP मूवमेंट के लिए ट्रैफिक व्यवस्था बदली गई थी, तो भारी वाहनों को रोकने के लिए कोई कदम क्यों नहीं उठाया गया? क्या एक समारोह में शामिल होने की जल्दबाजी में एक मासूम की जान की कीमत चुकानी पड़ी? ये सवाल न केवल जोधपुर, बल्कि पूरे देश में VIP संस्कृति और आम जनता की सुरक्षा के बीच टकराव को उजागर करते हैं।

जोधपुर में ट्रैफिक समस्याएँ : एक बड़ा मुद्दा

जोधपुर में ट्रैफिक समस्याएँ कोई नई बात नहीं हैं। हाल के वर्षों में, शहर में बढ़ते यातायात दबाव को कम करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। उदाहरण के लिए, 938 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला जोधपुर एलिवेटेड रोड प्रोजेक्ट और एयरपोर्ट पर डबल-वे व्यवस्था जैसे प्रयास ट्रैफिक जाम को कम करने की दिशा में हैं। फिर भी, VIP मूवमेंट के दौरान अचानक बदली गई ट्रैफिक व्यवस्थाएँ अक्सर आम लोगों के लिए परेशानी का सबब बन जाती हैं।

आज़ादी का जश्न और माँ के आँगन में सन्नाटा

आज जब देश स्वतंत्रता दिवस का जश्न मना रहा है, तिरंगे की शान में समारोह हो रहे हैं, उस माँ के आँगन में सन्नाटा पसरा है, जिसने अपने बच्चे को खो दिया। यह घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हमारी आज़ादी का मतलब सिर्फ समारोह और उत्सव हैं, या हमें ऐसी व्यवस्था की जरूरत है जो हर नागरिक की जान की कीमत को समझे?

क्या है मांग?

सोशल मीडिया पर लोग इस घटना की निष्पक्ष जाँच की मांग कर रहे हैं। साथ ही, VIP मूवमेंट के दौरान ट्रैफिक प्रबंधन में सुधार और आम लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की अपील की जा रही है। यह भी सुझाव दिया जा रहा है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त नियम बनाए जाएँ, जैसे भारी वाहनों पर पूर्ण प्रतिबंध और आपातकालीन सेवाओं के लिए विशेष व्यवस्था।
यह घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि हमारी प्रणाली की खामियों का प्रतीक है। जब तक VIP और VVIP की सुविधा को आम लोगों की जान से ऊपर रखा जाएगा, तब तक ऐसी त्रासदियाँ होती रहेंगी। जोधपुर की इस घटना ने एक बार फिर हमें यह सोचने पर मजबूर किया है कि क्या हमारी आज़ादी का जश्न वाकई में सभी के लिए है?
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