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कहानी गंगासागर की : 1.50 लाख का रंगीन फव्वारा बना शोपीस, हमेशा रहता है बंद।

नगर पालिका की अनदेखी के चलते रंगीन फव्वारा हुआ बदहाली का शिकार

कहा था शेर के मुंह से निकलेगा पानी, फव्वारें से मिस्टर इंडिया हुए शेर

अपने ही कार्यो को नजर अंदाज कर रही नगरपालिका, जनता को नही मिल पा रहा लाभ।

*हेमंत साहू, बालोद
शहर के ऐतिहासिक गंगासागर तालाब में रौनकता लाने लाखों की लागत से बनाया गया फव्वारा खस्ताहाल होते नजर आ रहा है। निर्माण के बाद गत वर्ष अप्रैल-मई माह में जिस दिन से इस फव्वारे को शुरू किया गया है। तब से लेकर आज तक ने शहर की जनता ने चलते हुए नही देखा होगा। ज्यादातर समय यह फव्वारा बंद ही रहता है। इसकी सुध लेना वाला कोई नहीं है। जिला योजना समिति के सदस्य और पार्षद नितेश वर्मा ने गंगासागर तालाब में सौंदर्यीकरण के नाम पर बेजा राशि खर्च कर अनदेखी का आरोप लगाते हुए बताया कि, महज एक साल पहले गंगासागर उद्यान में फाउंटेन, नोजल, लाइट और पाईप फिटिंग के नाम पर 1.50 लाख रुपए की राशि खर्च कर दस मीटर लंबा और डेढ़ मीटर चौड़ा फाउंटेन तैयार कराया गया था।
दावा था; फाउंटेन से निकलेगा रंगीन फव्वारा : निर्माण के दौरान दावा किया गया था कि, गंगासागर तालाब उद्यान में प्रतिदिन शाम 5 बजे से रात 8 बजे तक 10 मीटर लंबे और डेढ़ मीटर चौड़े फाउंटेन से रंगीन फव्वारा निकलेगा।

कहा था शेर के मुंह से निकलेगा पानी, फव्वारें से मिस्टर इंडिया हुए शेर

निर्माण के दौरान फाउंटेन में शेर की आकृति बनाई गई थी और जिम्मेदार ढिंढोरा पीट-पीटकर शहर की जनता को बताते रहे की शेर के मुंह से पानी निकलेगा लेकिन ट्रायल के कुछ दिनों बाद ही फाउंटेन के ऊपर बना शेर गायब हो गया।

नगर पालिका की अनदेखी के चलते फव्वारा हुवा बदहाली का शिकार

सदस्य और पार्षद नितेश वर्मा ने बताया कि, नगरपालिका के अधिकारियों की उदासीनता के चलते उद्यान में लगे फव्वारे का संचालन नहीं हो पा रहा है। गंगासागर तालाब की सुंदरता व रौनकता बढ़ाने फव्वारें का निर्माण तो करा लिया गया, लेकिन अब यह देख-रेख के अभाव में खस्ताहाल होता जा रहा है। शहर की जनता देखरेख के अभाव में फव्वारे का लुत्फ नही उठा पा रही है।

गुणवत्ता ताक पर

 1.50 लाख रुपए की लागत से गुणवत्ता को ताक पर रखकर फव्वारें का निर्माण किया गया है। बनने के बाद अब फाउंटेन पर लगे टाइल्स उखड़ने लगे है।

फव्वारा नही चला सकते थे तो सरकारी राशि का दुरुपयोग क्यो

 निर्माण के दौरान किये जा रहे दांवों के चलते नागरिकों ने कार्य की सराहना की थी, मगर उन्हें क्या मालूम था कि यह फव्वारा केवल शो-पीस बनकर रह जाएगा। सदस्य और पार्षद नितेश वर्मा ने ऐसे निर्माणों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि, “अगर फव्वारे को चला नहीं सकते थे तो निर्माण कर सरकारी राशि का दुरुपयोग क्यो करवाया गया।”

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