अधिकारीयों की मिलीभगत में अवैध अहातों का हो रहा संचालन !
एक तिहाई अहाता ठेकेदार हो गए ठण्डे

रायपुर hct : एक लम्बे समय से शराबबंदी को लेकर उहापोह की स्थिति में सरकार शराबबंदी तो नहीं कर सकी बल्कि नई आबकारी नीति के तहत राज्यभर में अहाता पॉलिसी (फुटकर दुकान नीति) लेकर मैदान में कूद पड़ी है। इसके लिए छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कार्पोरेशन लिमिटेड ने 15 मार्च 2024 को बाकायदा विज्ञप्ति जारी कर (Tender) निविदा भी आमंत्रित की गई थी। टेंडर 10 मई को खोला गया था।
अहाता के खाता : 100 करोड़ से अधिक राजस्व का लक्ष्य…!
विभागीय सूत्रों के मुताबिक खबर थी कि, पॉलिसी अमल हुई तो सरकारी कोष में करोड़ों रुपए “अहाता के खाता” से शराब के अलावा अनुमानतः 80 से 100 करोड़ रुपए से अधिक का राजस्व प्राप्त होने का अनुमान लगाया गया था, मगर अहाता के लिए ऑनलाईन प्रक्रिया से राज्य सरकार को 103 करोड़, 54 लाख, 17 हजार 300 रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ है। रायपुर जिला में विदेशी एवं कम्पोजिट मिलाकर 78 शराब दुकाने हैं, अहाता खोलने के लिए 56 शराब दुकानों का चयन कर टेंडर निकाला गया था। इनमें से एक को छोड़कर 55 अहातों के लिए बोली लगाई गई थी। टेंडर खोलने पर सबसे ज्यादा बोली लगाने वालों को अहाता का ठेका दिया गया है।
एक तिहाई अहाता ठेकेदार हो गए ठण्डे
अहाता खोलने के लिए ठेकेदारों को कुल ठेके की राशि का 6 प्रतिशत बैंक गारंटी के रूप में जमा कराना था। यह राशि जमा कराने के बाद ही ठेकेदार को लाइसेंस जारी होना था। जिला के 55 अहातों के लिए 361 आवेदन जमा हुए जिनसे प्रोसेसिंग फीस और जमानत की रकम लगभग 5.50 लाख शुरुआत में ही कोष में आ गई। बोली लगने के बाद रायपुर के एक अहाता की बोली जहाँ एक करोड़ के आंकड़े के नजदीक जा पहुँचा, वहीँ जानकारी के मुताबिक 55 में से 5 अहातों के ठेकेदार लाइसेंस लेने ही नहीं पहुंचे। विभाग ने जब उनसे मोबाइल पर संपर्क किया, तो सभी ने तरह-तरह के बहाने बताते हुए अहाता चलाने से इनकार कर दिया।
माल-ए-मुफ्त …
इसे पढ़कर आप कोई गलतफहमी न पालें। मैं कोई मुफ्त चीज बांटने नहीं जा रहा हूं। इस कहावत का अर्थ है कि यदि कोई चीज मुफ्त में मिल रही हो, तो फिर उसके लिए हाथ, जेब और झोली के साथ ही दिल भी बेरहम हो जाता है। भले ही वो हमारे काम की हो या नहीं। अतः 56 (-1) यानि कि 55 में 5 ने तो विष्णु के इस अहाता पॉलिसी नामक सुदर्शन के सामने नतमस्तक हो गए और जिनके इरादे बुलंद थे वे 16 लोग सांय सांय मैदान में डटे हुए हैं मगर इनमें से 35 से 39 लोग जो हैं वे निढ़ाल हो चुके हैं।
big breaking : अधिकारियों की मिलीभगत से चल रहा (अवैध) अहाता !
अब जबकि 55 में से 5 ठेकेदारों का अहाता निरस्त किया जा चुका है, और एक माना देशी मदिरा अहाता के लिए एक भी आवेदन नहीं आया था। बाकी के 48 ठेकेदारों ने लाइसेंस की फीस जमा करा दी है। अब खबर मिल रही है कि अभी तक लगभग 35 ठेकेदारों ने अहाता व्यवसाय से दूरी बना रखा है जिसके पीछे की सच्चाई यह कि इन 35 अहाता से मिलने वाली रकम राजस्व के आय का हिस्सा होता, मगर अब यही रकम भ्रस्ट कमीशनखोर अधिकारीयों की झोली में भरी जाने की अंदेशे से इंकार नहीं किया जा सकता।
